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चलता हूं फिर
चलता हुआ फिर 5 साल बाद आएंगे, फिर से एक बार युवाओं का ब्रेनवाश करेंगे, कुछ धार्मिक उन्माद फैला आएंगे, युवाओं का खून खौलाएंगे, विभिन्न समुदायों में घृणा पैदा करेंगे, फिर सता को छीन लेंगे। विदेशों में जाएंगे और विदेशों से कुछ ना पाएंगे, फिर आकर देश में बहाना बनाएंगे, इसमें अब मेरा क्या है दोस्त? आज भी पश्चिम देश मुझे गरीब कमजोर प्रधानमंत्री ही समझता है। सता आएगी सता जाएगी, दोनों ही तरफ से मुझे ही फायदा, क्योंकि नहीं है दूसरा विकल्प यहां, यह है भारत का लोकतंत्र। परीक्षाओं से करते है चपरासी बहाल, हम तो हैं यहां मालामाल, कौन उठेगा मेरे खिलाफ? कृषि सेस के नाम पर करोड़ों हम कमाएंगे, नहीं होगा विकाश कृषि का, किसान को फांसी दिलाएंगे। चलता हुआ अब 5 साल बाद आएंगे। इमानदारी तो एक बहाना है, हमें तो जीएसटी से पैसा कमाना है, 12.5% से उठाकर 28% टैक्स कर दिया, रेलवे किराए में भी हमने कई बार बढ़ोतरी कर दिया, 70% गरीब आबादी ट्रैवल कहां से कर पाएंगे, ना देख पाएंगे देश न देख पाएंगे दुनिया, घर में ही रहेंगे लाचार सा, आ...
बारिश और पुरानी यादें
पटना में भारी बारिश के कारण जनजीवन बाधित। लोगों के घरों में घुसा पानी। जनजीवन बाधित। ऐसे ही वर्षा के दिनों में, मैं गांव पर रहता था तो बारिश में भीग कर भी भैंस चराया करता था। शुरू के दिनों में मैं भैंस चराया करता था। बारिश में भीग कर भी ठिठुरते हुए भैंस चराते थे। कई कई बार बिजली कड़कती रहती थी, पत्थर गिरते रहता था । पेड़ के नीचे गया तो बिजली गिर पड़ी। मुझे आग सा महसूस हुआ फिर दो-चार दिन बाद वह पेड़ सुखा हुआ देखा। अभी भैंस चराने का काम जारी रखा परंतु अब पेड़ के पास नहीं बैठता था। भैंस चराते समय पैर से नहर पर सांप दब जाते थे ,काट भी लिया करते थे। मगर मैं किसी को बताता नहीं था। घरवाले सोचेंगे थोड़ा सा सांप नोचा है तो क्या हो जाएगा? नहर पर तरह-तरह के कीड़े काटते रहते थे। क्योंकि नहर पर झाड़ियां थी । झाड़ियों के बीच में रहकर में भैंस चराया करता था।


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